Spiritual Secrets of Bhagwat Gita

Spiritual Secrets of Bhagwat Gita

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, पुणे मीरा सोसायटी सेवाकेंद्र द्वारा सभी गीता प्रेमियों के लिए पुणे के भण्डारकर प्राच्य विद्या संशोधन केंद्र में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमे 150 इतिहास संशोधक, संस्कृति विद्वान, मानसशास्त्र एव तत्वज्ञान अध्यापकों ने भाग लिया ।

ब्रह्माकुमार दशरथ भाई ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए बताया कि गीता केवल 700 शोलोकों का छोटा शास्त्र है लेकिन उसके विश्लेषण के इतने ग्रंथ बने है कि पुस्तकों का पहाड़ हो सकता है । परमात्मा ने प्रजापिता ब्रह्मबाबा के द्वारा 14 वर्ष 300 कन्याओं को गीता का ज्ञान सुनाया जिसके आधार से 1950 से सम्पूर्ण भारतवर्ष एव 1974 से विश्व के 137 देशों में यह ईश्वरीय ज्ञान को फैलाया और अनेकों का भाग्य बनाया गया।

मुम्बई से ब्रह्माकुमार राजीव गुप्ता, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ गीता के स्कॉलर एव संशोधक है, इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे । उन्होने अपने रिसर्च के आधार पर गीता के विषय में अनेक विवाद अथवा अलग अलग मान्यताओं पर प्रकाश डाला । उन्होंने सभीसे अपील की कि गीता केवल हिन्दू धर्म का शास्त्र नहीं है लेकिन सारे विश्व का शास्त्र है और सभी धर्मों का संबंध गीता से है । गीता का ज्ञान देनेवाला कोई व्यक्ति अथवा देवता न होते वही निराकार है जिसका उल्लेख हर धर्मों में किया गया है ।

हुबली से आदरणीया वीणा बहन जो गीता का अध्ययन पिछले 40 वर्षों से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में कर रहे है, वे कार्यक्रम के सचिव थे । उन्होंने गीता में वर्णित अर्जुन की मनः स्तिथि तथा उसका समाधान पर प्रकाश डाला । साथ-साथ गीता में बताएँ उपदेशों को सामान्य मानव किस तरह अपने जीवनशैली से जोड़ सकता है, उसपर सभी का मार्गदर्शन किया ।

श्री मुकंद दाता, पुणे गीताधर्म मंडल के अध्यक्ष इस कार्यक्रम के अध्यक्ष थे । उन्होंने ब्रह्माकुमारीज् द्वारा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में किये जाने वाले कार्यों की सराहना की एवं मानव कल्याण के लिए ब्रह्माकुमारीज् के प्रयासों का अभिनंदन किया । उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि गीता धर्मशास्त्र नहीं अपितु आध्यात्मिक शास्त्र है । गीता को आपके जीवन में अपनाने के लिए उन्होंने कुछ श्लोकों पर सभी का ध्यान खिंचवाया ।

यह कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी श्रोताओं को भागवत गीता के बारे में नई एवं स्पष्ट जानकारी एवं मार्गदर्शन मिला । सभी ने इस कार्यक्रम की सराहना की । राजयोग मैडिटेशन एवं ब्राह्मणभोजन से कार्यक्रम की समाप्ति हुई ।

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